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क्रिकेट मैदान बना विवाद का अखाड़ा, मोहम्मद कैफ ने दिग्वेश सिंह के ‘नोटबुक विदाई’ पर उठाए सवाल

लखनऊ (उत्तर प्रदेश):-  क्रिकेट के मैदान में खेल भावना और प्रतिस्पर्द्धा के बीच की महीन रेखा अक्सर विवादों को जन्म देती है। हाल ही में एक घरेलू क्रिकेट मैच में ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब उत्तर प्रदेश के युवा बल्लेबाज प्रियांश आर्य को आउट करने के बाद दिग्वेश सिंह ने उन्हें नोटबुक दिखाकर विदाई दी। इस घटना ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ को नाराज़ कर दिया जिन्होंने दिग्वेश के इस व्यवहार पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे खेल भावना के विपरीत बताया।

यह घटना उस समय हुई जब प्रियांश आर्य एक महत्वपूर्ण पारी खेल रहे थे और अपनी टीम को जीत की ओर ले जा रहे थे। दिग्वेश सिंह ने प्रियांश को आउट किया और फिर उन्हें नोटबुक दिखाकर कुछ इशारा किया। इस इशारे को प्रियांश के प्रदर्शन को लेकर तंज माना गया। दिग्वेश का यह व्यवहार न केवल मैदान पर मौजूद दर्शकों को हैरान कर गया, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसकी तीखी आलोचना हुई।मोहम्मद कैफ जो अपनी साफगोई और खेल भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते है ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा “मैं यह देखकर हैरान हूँ कि दिग्वेश सिंह ने प्रियांश आर्य को नोटबुक दिखाकर विदाई दी। यह कौन सा पत्र लिख रहे हैं, क्या यह खेल भावना है,क्रिकेट एक ऐसा खेल है जो सम्मान और गरिमा की मांग करता है। इस तरह के व्यवहार से युवा खिलाड़ियों पर गलत प्रभाव पड़ता है।”

कैफ ने आगे कहा “प्रियांश आर्य एक प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी हैं और उन्होंने अपनी पारी से यह साबित किया है। उन्हें इस तरह से विदाई देना न केवल अपमानजनक है बल्कि अनुचित भी है। खेल में जीत और हार लगी रहती है लेकिन हमें हमेशा खेल भावना का सम्मान करना चाहिए।”दिग्वेश सिंह के इस व्यवहार पर क्रिकेट जगत में भी तीखी प्रतिक्रिया हुई है। कई पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट विशेषज्ञों ने इसे खेल भावना के विपरीत बताया और दिग्वेश की आलोचना की। कुछ लोगों ने यह भी मांग की कि इस घटना की जांच की जाए और दिग्वेश के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

इस घटना ने युवा खिलाड़ियों के लिए खेल भावना के महत्व पर एक बार फिर से बहस छेड़ दी है। कई लोगों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों को खेल भावना के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए और उन्हें यह सिखाया जाना चाहिए कि जीत और हार को गरिमा के साथ कैसे स्वीकार किया जाए।क्रिकेट में इस तरह की घटनाएँ पहले भी होती रही हैं लेकिन मोहम्मद कैफ जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की प्रतिक्रियाएँ युवा खिलाड़ियों को सही राह दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। खेल भावना को बनाए रखना न केवल खिलाड़ियों की जिम्मेदारी है बल्कि क्रिकेट प्रशासन और दर्शकों की भी जिम्मेदारी है।

इस घटना के बाद दिग्वेश सिंह की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या दिग्वेश सिंह को अपने व्यवहार के लिए माफी मांगनी पड़ेगी।क्रिकेट मैदान पर इस तरह की घटनाएँ खेल की गरिमा को ठेस पहुँचाती हैं और युवा खिलाड़ियों के लिए गलत उदाहरण पेश करती हैं। यह महत्वपूर्ण है कि हम खेल भावना को बनाए रखें और यह सुनिश्चित करें कि क्रिकेट एक ऐसा खेल बना रहे जो सम्मान और गरिमा का प्रतीक हो।

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